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Hymn No. 2748 | Date: 13-Dec-2003
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गुजर गये हम, गुजर गये, जहां जहां से गुजरना था वहां से हम गुजर गये।
गुजर गये हम, गुजर गये, जहां जहां से गुजरना था वहां से हम गुजर गये।
सैलाब कितने आये जिंदगी मैं, बहते गये कभी साथ तो कभी विपरीत मैं गुजर
रुकना चाहा रुक न सके, गम हो या दौर खुशी का, पल पल हम गुजरते गये।
परवाह करुँ या न करूँ पस्त हौसले थे या हिम्मत से भरे हम यूंही गुजरते गये।
आईना दिखलाया हालातों ने, खुली आंखो से निहारते निहार न सके हम जिंदगी को।
चढ़ाया गया कभी कर्मों की सूली पे, तो कभी इच्छाओं की वेदी पे चुपचाप हम गुजरते गये।
अपने आपको देखता हूँ कभी पास से कभी दूर से वाह रे क्या किरदार निभाया जिंदगी मैं।
धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद पहले परमपिता तुझको, फिर सारे जमाने को जो अहसास कराये गुजरने का।
परदा गिरने वाला है, तालियाँ जोर से बजाना, फिर से नया रूप लेके जो मैं आने वाला हूँ।
क्या फर्क पड़ता है आने जाने का, जो हर पल विराजे अंतर मैं वो, गुजरके जो न गुजरने वाले हैं हम।


- डॉ.संतोष सिंह