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Hymn No. 2749 | Date: 13-Dec-2003
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हारे कोई, जीते कोई, रोये कोई, खुशियाँ मनाये कोई, करने में मशगूल है हर कोई।
हारे कोई, जीते कोई, रोये कोई, खुशियाँ मनाये कोई, करने में मशगूल है हर कोई।
दूर से चुपचाप बैठे निहारे कोई बिरला, बोले कभी या न बोले यों ही देखे वो सदा।
समझे कोई न समझे कोई, कोई दे सम्मान, कोई करे अपमान, उसकी नजरें तो सबसे परे है।
परवाह करे या न करे कोई वो तो रहे खोया, जो जन्मों से है बिछुड़ा मिला है आज अपना।
अतृप्त है कोई, तो तृप्त है कोई, मन भरने पे चाहे सब दूजा, वो तो रमें सदा बस एक में।
अपना हो या कोई पराया, प्रेम से जिसने नजरों को लड़ाया, चुपचाप देता रहे वो सबको सदा।
कोई छले तो कोई न छले, करता रहे कोई कैसा दिखावा, वो न आये किसीके बहकावे में
किसीकी मर्जी हो या किसीकी बेमर्जी, ताबे मैं न आये वो किसीके, भोग तो भोगना पड़ा सबको
सनातन को तू जाने, सनातन को तू माने, अमानत तेरी वो है जिसे कोई चुरा न पाये
नजरों का है फर्क, जो देंखे तेरी नजरों से, वो पल पल निहारे तुझे चाहे हो वो कोई।


- डॉ.संतोष सिंह