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Hymn No. 2750 | Date: 23-Dec-2003
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हर बार की तरह इस बार भी लौंटा हूँ, तेरे गीतों को गाने के वास्ते, तेरे ख्वाबों में खो जाने के वास्ते।
हर बार की तरह इस बार भी लौंटा हूँ, तेरे गीतों को गाने के वास्ते, तेरे ख्वाबों में खो जाने के वास्ते।
हर बार की तरह इस बार भी कर जाना चाहू कहा तेरा, रुकने न पाऊं अब मनमानी गलियों मैं।
हर बार की तरह इस बार भी खों जाना चाहूँ तुझे अपने दिल मैं संजोके होता रहे कुछ भी हो जाऊँ मैं तेरा।
हर बार की तरह इस बार ढल जाऊँ, तेरे प्रेम के सांचे में, लूं कितने भी जन्म रहूँ अंतर मैं तेरे।
हर बार की तरह अंदाज न हो जिंदगी की, सौंगात दूँ में तुझे कुछ ऐसी वाह वाह निकले तेरे मुख से।
हर बार की तरह न फूटे प्रेम अंकुर, इस बार जो फूटे अमर प्रेम के अंकुर तो अनवरत रमता रंहू मैं तुझमें।
हर बार की तरह इस बार न हो कुछ ऐसा, जो रोक सके मुझे, रुकने से पहले रहूँ तेरी बाहों मैं।
हर बार की तरह, तरह तरह की बात न हो जुबां पे, मौन जो हो जाऊँ प्रियतम तेरे आगोश मैं पहुँचके।
- डॉ.संतोष सिंह
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हारे कोई, जीते कोई, रोये कोई, खुशियाँ मनाये कोई, करने में मशगूल है हर कोई।
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छलना न चाहूँ हर बार की तरह, इस बार प्यार के रंग मैं रंग देना चाहूँ।
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