VIEW HYMN

Hymn No. 2752 | Date: 24-Dec-2003
Text Size
अब की बार लौटा हूँ, तेरा हो जाने के लिये।
अब की बार लौटा हूँ, तेरा हो जाने के लिये।
अब की बार चाहा हूँ, अंजाम को पाने के लिये।
अब की बार सुना हूँ, तेरा कहा कर जाने के लिये।
अब की बार देखा हूँ, तुझमें खो जाने के लिये।
अब की बार मचला हूँ, तेरे चरणों मैं छलक जाने के लिये।
अब की बार दिल लगाया हूँ, तेरे दिल मैं बस जाने के लिये।
अब की बार चला हूँ, तेरे पास पहुँच जाने के लिये।
अब की बार संजोयॉ हूँ, तुझमें रच बस जाने के लिये।
अब की बार लुटाया हूँ, तेरे हाथों से संवर जाने के लिये।
अब की बार दूंगा विराम, तेरे पास पहुँचके हमेशा के लिये।


- डॉ.संतोष सिंह