VIEW HYMN

Hymn No. 2755 | Date: 08-Jan-2004
Text Size
समाये, समाये, समा, प्रभु मेरे अंतर मैं तेरे सारे गुण।
समाये, समाये, समा, प्रभु मेरे अंतर मैं तेरे सारे गुण।
निरामय होके रमूँ संसार मैं, कोई भी गुण दे न पाये मेरे अंतर को।
कहने को करता रहूँ पल पल, अकर्ता बनके जिऊँ संसार में।
भोग विलास हो या फाका मस्ती, मेरे जीवन की किश्ती बिन हिचकोले बढ़ती जाये तेरी ओर।
रंज न हो हालात से, न ही किसी और बात से, बीते जिंदगी पल पल बंदगी में तेरी।
अहसास न हो तुझे प्यार करने का, प्यार की मस्ती में जो हर पल हो दिल डूबा।
छलक न जाऊँ जमाने को पाके, अंतर मैं रहना पल पल तू मेरे।
चस्पे कुछ भी इस तन पे, पर मन और दिल पल पल लीन रहे तुझमें।
तेरी ही बाते हों, तेरे ही ख्वाब हों, तेरे सिवाय कुछ भी रहे पर तस्वीर तेरी।
दिशा तो तय है, अब आगे ले चल तू मुझे, प्यार के अनमोल बंधन में बांधके।


- डॉ.संतोष सिंह