VIEW HYMN

Hymn No. 2756 | Date: 16-Jan-2004
Text Size
दिल ने दिल से बात कही, दिलदार को देखते।
दिल ने दिल से बात कही, दिलदार को देखते।
दिलदार के रहते, क्यों है हम महफूज प्यार से उसके।
समझ न पाऊँ जितना करीब जाना चाहूँ, उतना दूर चला जाऊँ।
प्यार मेरा इतना झूठा कैसा है, जो फितरतों के सामने झुक जाये।
कही बलि चढ़ाना चाहा, खुद ही चढ़ गया करतूतों के फेर मैं।
शर्म से शरमाया, हर बार रोते रोते तेरे द्वार आया।
क्यों नहीं पार पाता हूँ, तन की सीमाओं को तोड़के।
हर कोशिश क्यों बेंकार हो जाती है, तेरे इतना करीब रहके।
वो हौंसला दे दे, जहां न हो शिकायत किसीसे।
भर दे वो जज्बा, रोशन करुँ प्यार को दिल से दिल जोड़के।


- डॉ.संतोष सिंह