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Hymn No. 2764 | Date: 14-Mar-2004
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दिल चाहता है कई बार तुझसे मिलने के लिये, धोखा दे जाये कर्म मेरे।
दिल चाहता है कई बार तुझसे मिलने के लिये, धोखा दे जाये कर्म मेरे।
हर बार उबरूं मैं अपने आप से कुछ करने के लिये, हार जाता हूँ माया के आगे।
कई बार झिंझोड़ा कर दूं साकार ख्वाबों को तेरे, विपरीत हालातों के आगे हारा बार बार।
कई बार तोड़ना चाहा चुप्पी को तेरे जो कहे कुछ तू मुझसे, गहन चुप्पी छा जाये मन पे मेरे।
दिल पुकार पुकार के कहे कर दे शुरुवात तू आज से, निरंतर का हाथ थाम कर बढ़ जाओगे।
संजीदगी से करेगा जो तू प्रयास सारे कयासों से आगे चलेगा तू, आज का आज जा पहुँचेगा अटल सत्य के पास।
फूटेंगी नई रश्मियाँ, खिलेंगे जीवन मैं कई नये फूल, जो करेगी माँ के परम् स्वरूपों को।
तब हर हालत मैं होगा हर ख्वाब साकार, नाकारा हुआ तुझको भी स्वीकारेगी।


- डॉ.संतोष सिंह