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Hymn No. 2765 | Date: 15-Mar-2004
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गांऊ रे गाऊं गीत तेरे प्रेम के, मस्ती मैं झूमूँ हर पल प्रेम में तेरे।
गांऊ रे गाऊं गीत तेरे प्रेम के, मस्ती मैं झूमूँ हर पल प्रेम में तेरे।
सताये चाहे मन को कुछ भी, रह न पाये एक पल दिल तेरे बिन् भी।
एक ही गीत हो परम् प्रेम का, धुन बदलते रहे चाहे हर दिन हर पल।
घटाये न ये कभी घटे, तुझे देखते या याद आते ये दिन दूनी रात चौगुनी होती जाये।
नाचूँ घर या बाहर, जो दिल को रह रहके तेरी बातें गुदगुदाती जाये।
व्यथा तो बस एक है विरह की, न जाने कब तक, कैसे रहा हूँ दूर मैं तुझसे।
चलाये अब न ये चले, कल की छोड़ो वो तो आज अभी इसी पल मिलना चाहे।
बिसर जाना चाहे खुद को, तेरे प्रेम मैं पल पल वो तो सराबोर रहना चाहे।
बीतूँ उससे पहले महामिलन हो जाये, परवाह नहीं दिल को चाहे कुछ भी हो जाये।
छेडूँगा अनंत राग तब एक, सुनना सुनाना हो जायेगा तब एक।


- डॉ.संतोष सिंह