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Hymn No. 2772 | Date: 30-Mar-2004
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मत छोड़के जाओ हमको तुम ऐसे ही, जाने को न जायेगा तुम्हारा कुछ।
मत छोड़के जाओ हमको तुम ऐसे ही, जाने को न जायेगा तुम्हारा कुछ।
झूठा सही पर प्यार का हूँ मारा, भरी जवानी मैं विधुर बनके रह जाऊंगा।
चाहने वाले होगे तुम्हारे हजारों, बिसात कोई नही मेरी तुम्हारी दुनिया में।
चले जाओ अपने प्रियतम् के पास, प्यार में प्यार बनके बस जाओं प्रियतम के साथ।
दर दर भटकेंगे हम दुनिया मैं यहां वहां फिरते याद करकें।
बेवफाई की होगी हमने लाख, पर प्यार से हर पल दिल तुझे याद करता रहा।
मत देखं तू मेरे कर्मों को, जन्मा हूँ तुझसे तेरे ही माया का मारा हूँ।
आज जब जुड़ना चाहूँ, तो क्यों तू छुड़ाये हौले हौले तेरे हाथों को।
महक अभी भी है तेरे प्यार की श्वासो मैं, जहाँ जाऊँ तेरी ही याद दिलाये।
दिलासा न चाहिये चाहिये अनवरत् कृपा जो टूटने न दे प्यार की कड़ी को।


- डॉ.संतोष सिंह