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Hymn No. 274 | Date: 12-Aug-1998
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यह सोचके आनंदित हो उठता हूँ, होगी मुलाकात कल तुझसे ;
यह सोचके आनंदित हो उठता हूँ, होगी मुलाकात कल तुझसे ;
इस कल को कीतनी बार कल में रखा मैंने, अब तू बदल दें आज में इसे ।
पल भर की देरी सही नहीं जात, आँसूओं का सैलाब उमडता है आँखों में;
मेरे आँखों में आँसू तूझे लगते है अच्छे, तो मिलन के बाद झर – झर वहा करेंगे।
बारिश तो बरसे साल के चार महीनें; कभी सूखा – कभी जमके बरसे बरसा,
मेरे आँखों के आँसू कब उमड - घुमड के बरस जायेगे, ये खुद ना मुझे पता।
कौन सी तेरी बात दिल को छू जायेगी, तेरे मेरे दिलों के बीच की दूरा का न जाने कब अहसास हो जायेगी।
रहती है मौके की तलाश मैं रहूँ अकेला या भीड़ से घिरा, बिन घटाओं के बरस जायेगे ।
मैं हूँ झूठा तो क्या, मेरे आँसू तो झूठें नहीं इतना आँसू बहाऊँगा खुद भी आँसू बन बह जाऊँगा
तेरे पैरों को चूमते हुये, मैं उन्हीं चरणों में समां के शरण पाऊँगा ।
- डॉ.संतोष सिंह
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