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Hymn No. 2795 | Date: 06-May-2004
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खिला खिला रहे मन, माँ जब दिल भरे प्यार की तरंगो से।
खिला खिला रहे मन, माँ जब दिल भरे प्यार की तरंगो से।
यों ही पल पल मूस्कराता रहूँ, हर पल जो तू आये यादों मैं मेरी।
थिरके कदम अनजाने मैं, जो गूंजे बोल अमृत से अंतर मैं मेरे।
हर पल सजदा करना चाहूँ, जहाँ भी निगाह उठे पाऊँ मैं तुझे।
बातों बातों मैं निकले बात तेरी, जो देखूँ निरंतर ख्वाबों के तेरे।
करता चला जाऊं कहा तेरा, भान न हो करने का जो मसरूफ रहूँ तुझमें।
मगरूर कोई कहे इसे मेरी, पर सच मैं ये तो इनायत है प्यार की तेरे।
जिंदगी के सारे नजरिये बदलते जायें, जब से दिल जो जुड़ा तुझसे।
पा जाऊंगा बहुत कुछ फिर भी खालीपन रहेगा जो, तुझसे दूर हूंगा।
हिला के रख देती है जब पीछे की ओर देखूं तो दौडूं ओर तेजी से ओर तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह