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Hymn No. 276 | Date: 13-Aug-1998
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ऐ दिलबर मेरे, तेरी हर बात कीतनी अजीब है,
ऐ दिलबर मेरे, तेरी हर बात कीतनी अजीब है,
जितना तू सजीव, उतना ही हम निर्जिव है ।
भटकते फिरते है तेरे लिये गुफाओं और कंदराओं में,
कभी अपने अंदर उतर के झाँकते नहीं ।
तन पे तन बदला पर अपने मन को ना बदला,
बूत – अबूत के चक्कर में कई - कई जिंदगी को होम कर डाला ।
तू है सर्वस्व विद्यमान, जब चाहा ढाला खुद को निराकार से आकार में,
तेरी मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता इस ब्रह्माण्ड में ।
जिसने तूझे पाने के लिये संसार के ज्ञात हर नियम को तोड़ा;
उसके संग – संग तू डोला, अपनी खुदाई छोडके ।
तेरी बड़ाई कर नहीं सकते हम, सुनी – सुनायी कह सकते है;
दया है तेरी, जो तू पास आन देता है हमें।


- डॉ.संतोष सिंह