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Hymn No. 277 | Date: 14-Aug-1998
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कभी ना कभी सभी तेरी शरण में आते है ।
कभी ना कभी सभी तेरी शरण में आते है ।
ना कोई जल्दी, ना ही देर से, सब तेरे बुलाने पे चले आते है ।
कमजोर मन वाला भी, तेरी कृपा पाके दृढ़निश्चयी हो जाता है।
जो नियति के शिकार थे, कर्मों के कारण वो भी शोक मूक्त हो जाते है ।
बड़े से बडा या कोई भी, गर तेरे पास छोटा बनके आया, कुछ लेके लोटा है।
जिसने तेरा प्रेम पाया, उसके लिये तीन लोक का साम्राज्य फीका।
जो तेरी शरण में आया, ब्रह्मा की लेखनी उलट जात है ।
है जगतपिता तेरी वंदना करते है हम आज बार - बार;
तेरी आँखों में स्नेह रहे हम सबके प्रति, शरणागत है तेरे चरणों में
बेखबर तू ना है हमारी कमियों से, दूर रखना हमें सदा गलतियों सें,
प्यार के पुष्प अर्पित करता हूँ तेरे चरणों में
बस तेरी कृपा चाहते है, तेरा नाम हर पल लेने के लिये।


- डॉ.संतोष सिंह