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Hymn No. 2811 | Date: 12-Jul-2004
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पुकार है, पुकार है, सच या झूठ अंन्तर्मन की पुकार है।
पुकार है, पुकार है, सच या झूठ अंन्तर्मन की पुकार है।
धार है, धार है, कोरी या सच्ची आसुओं की धार है।
खोया हूँ या सोया हूँ, तेरे प्यार की दुनिया मैं पल पल खोया हूँ।
भुला हूँ या भटका हूँ, जो भी हो तुझसे ही मेरा नाता जुड़ा है।
स्वीकार कर, त्याग दे, हर हाल मैं तू सदा से मेरा है।
सफल हूँ या असफल हूँ मेरा नाता तो तुझसे हर पल जुड़ है।
काट दे या जोड़ दे, तुझसे दूर कभी न होऊंगा।
बनता हूँ या बिगड़ा हूँ, कर्मो का ही तो सारा झगड़ा है।
दूर रह या पास रह, रहूँगा मैं सदा तेरा, तू ही तो मेरी मजिल है।


- डॉ.संतोष सिंह