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Hymn No. 2812 | Date: 13-Jul-2004
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जो हम तुम्हारे न हुये, तो कैसे होंगे किसी ओर के।
जो हम तुम्हारे न हुये, तो कैसे होंगे किसी ओर के।
ये जन्म लिया है जो तेरे वास्ते, तो क्यों जायेगे दूर तुझसे।
काटो तो खून नहीं मर जायेगे तेरे बिन तो चैन नही दिल को।
लाख मिसाल दी बेवफाई की, फिर भी चाहा तुझसे प्रेम हमने।
हमको देख के जो बन जायेगा तू हम, तो कौन कहेगा खुदा तुझको।
जानते समझते सताया हजारों बार तुझे, फिर भी चैन न आया करतूतों से।
कसमें खायी लाखों लाख बार हमने, मौका मिलते दोहराया उन्ही कर्मों को।
बात बनते बनते बिगाड़ी कई बार हमने, तूने बिगड़ते बिगड़ते बनाया हर बार।
रब न तू छोड़ हमको हमारे हाल पे, जो तू छोड़े तो कौन अपनायेगा हमको।
आया हूँ न जाने कैसे कितने बरसों के बाद, पार पाऊंगा प्रभु तेरी करुणा से।


- डॉ.संतोष सिंह