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Hymn No. 2814 | Date: 13-Jul-2004
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हे प्रभु, मेरे प्रभु तू गिरधर हो या श्याम, कोई अल्लाह कहे या राम,
हे प्रभु, मेरे प्रभु तू गिरधर हो या श्याम, कोई अल्लाह कहे या राम,
तू है मेरा, दे दे दुनिया चाहे लाखों नाम या एक नाम।
छोड़ के जो तू जाना चाहे जा नहीं पायेगा, हर हाल मैं श्वासों से बंधा तू पायेगा।
पकड़ा है दामन तेरा, प्यार के छोर से, चाहके भी तू मुझसे खुद को छूड़ा न पायेगा।
लाख दे दे मेरे कर्मों को अंजाम, माया के जाल को तोड़के तेरे पास आऊंगा।
जो चाहा है तूने श्वासों के रहते कर दिखाऊंगा, हर पल प्यार को निभाऊंगा।
दिल को तोड़ा एक बार नहीं कई बार, फिर भी उफ् न किया अपने कर्मों से।
बहुत मन को फेरा निकलता फिर उलझता, अपने आपको कर्मों के जाल मैं फंसता पाया हूँ।
चुका हूंगा कई कई बार, पर टूटा नहीं, आज का आज तेरे ख्वाबों को साकार कर दिखाऊंगा।
दरकार बस तेरे मुहब्बत की है, इस दुनिया से न कोई सरोकार है मुझको।


- डॉ.संतोष सिंह