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Hymn No. 2815 | Date: 19-Jul-2004
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हरि के बंदे भज ले तू हरि को, हरि के बंदे हो जा तू हरि का।
हरि के बंदे भज ले तू हरि को, हरि के बंदे हो जा तू हरि का।
हरि बिन काम न आयेगा कुछ, रह जायेगा सारा कुछ पाया हुआ जग में।
लुटा लुटा के जाने से पहले भज ले तू हरि को, हरि के बंदे भज ले तू हरि को।
जन्मों की सौगात खड़ी है, हर किये की कोई न कोई भोग खडीं है।
हाथों से छूटे उससे पहले तू हो जा हरि का, हरि के बंदे भज ले तू हरि को।
श्वासों में खोयेगा तो सब कुछ पायेगा, जो देखा न सुना वो भी जान जायेगा।
साकार होगा हर ख्वाब श्वासों के छूटने से पहले, हरि के बंदे भज ले तू हरि को।
भाग्य की लिखी बदल जायेगी, देखते देखते कर्मों की हर बेड़ी टूट जायेगी।
मस्त मगन पल पल तू गायेगा, हरि के बंदे भज ले तू हरि को...
हरि नाम गुण गा ले तू हरि का, हरि के सिवाय कुछ न जगत में, हरि के बंदे भज ले तू हरि को...


- डॉ.संतोष सिंह