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Hymn No. 2816 | Date: 19-Jul-2004
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मुस्कराके रहती है पल पल मुख पे, प्यार बरसे नजरों से या धरा के हर कोने कोने से
मुस्कराके रहती है पल पल मुख पे, प्यार बरसे नजरों से या धरा के हर कोने कोने से
महक आये प्रेम भरी तेरे श्वासों की चारों दिशाओं से, क्या अपना क्या पराया हर किसी में जो तुझे पाऊँ।
डगर जाये जिस ओर वहां चलता चला जाऊँ बेफिक्री के आलम में तुझे हर ओर पाऊँ।
नशा है किस बात का समझना न चाहूं, मौत से पहले परम जीवन के अंदाज को जो चाहूँ
दिल का धड़कना हो बस तेरे लिये, शोर हो या मौनं गूंजे नाम सुबहो शाम तेरा ही तेरा।
कवायद न कर रहा कुछ की, कुछ हो जो प्रेम तेरा, प्रेम प्रेम प्रेम के सिवाय न हो कोई ओर बदल।


- डॉ.संतोष सिंह