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Hymn No. 2819 | Date: 28-Jul-2004
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उठ उठके सोता हूँ, रह रहके रोता हूँ, कुछ न कर पाने के गमों को ढोता हूँ।
उठ उठके सोता हूँ, रह रहके रोता हूँ, कुछ न कर पाने के गमों को ढोता हूँ।
दोष किसी को नहीं देता हूँ, अपने हाल को चुपचाप देखता हूँ।
कब बदलेगा जीवन मेरा, कहने को तो बदला हूँ, पर बदल बदलके न बदला हूँ।
जगायी है दिल मैं कोई आस, मत बुझने दे जल जाने से पहले तू उसे आज।
बहुत गिरी है जिंदगी की गाज, सहा हूँ हर पल तेरी कृपा से, मत कर तू अब पास।
अंजाम को पाना है, बिना रोये फरियादों को, चाहे हो दया या तेरी कृपा।
जो तेरा चाहा वो कर जाना है, हर रूकावटों को देखते देखते पार कर जाना है।
शातिर मन है, मन को तेरा दिवाना बनाना है बनते ही तुझमें चुपचाप खो जाना।
अब कुछ ओर न कहना है, कहे हुये को अब धीरे धीरे पूरा कर जाना है।
संजोया हूँ कोई ख्वाब, बदल जाने दे हकीकत में तू उसे आज का आज।


- डॉ.संतोष सिंह