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Hymn No. 2824 | Date: 11-Aug-2004
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ख्वाबों का क्या आ आके वो गुम हो जाते हैं दिन के उजाले में।
ख्वाबों का क्या आ आके वो गुम हो जाते हैं दिन के उजाले में।
समय का क्या आ आके वो गुम हो जाते है पलों मैं ढलके।
मौत का क्या आ आके वो बदल जाती है जीवन की तस्वीर।
अपनों का क्या, साथ रहते रहते बिछुड़ जाते हैं माया के चलते।
आसुओं का क्या, लुढ़क जाते है, यार की यादों में खोते ही।
चाहतों का क्या, पूरी होते ही दे जाते हैं जन्म नयी चाहतों को।
किस्मत का क्या, लिखी का लिखा पूरा किये बिना चैन न पाये।


- डॉ.संतोष सिंह