VIEW HYMN

Hymn No. 2825 | Date: 14-Aug-2004
Text Size
मत पूछो, मत पूछो, क्या क्या होता है, यार से बिछुड़ने के बाद।
मत पूछो, मत पूछो, क्या क्या होता है, यार से बिछुड़ने के बाद।
ख्वाबों में हंसते है, ख्यालों में रोते हैं, चैन नहीं पाते यादों में।
सब बेकार सा लगता है, सुबहो शाम जिंदगी एक सी लगती है।
कहने को तो वो सामने है, फिर भी सकून मिलता नहीं मन को।
यों ही जिंदगी जीते हैं, मायने नहीं रहता कुछ करने न करने का।
एक पाप का बोध होता है, हर पल अनहोनी से दिल डरता है।
क्यों बिछुड़ जाते हैं सराबोर होके माया में, साया भी दूर रहता है।
चला था तो ये न जाना था, मिलके बिछुड़ना होगा इस जन्म मैं।
किये को बार बार रोता हूँ, नये सिरे से चलना चाहके भी चल नहीं पाता हूँ।
चाहत रहते हुये भी आहत होता हूँ, ध्यान आने पे बहुत रोता हूँ।


- डॉ.संतोष सिंह