My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 2826 | Date: 14-Aug-2004
Text Size
न मैं ठहराने जा रहा हूँ, गलत को सही, न मेरा वास्ता है दूर दूर कहीं।
न मैं ठहराने जा रहा हूँ, गलत को सही, न मेरा वास्ता है दूर दूर कहीं।
इंसान का जन्म तो है खुदा की नेमत, तो क्यों किसी को सजा मिले जान की।
हर कोई तो मारा है खुद के कर्मों का, फल तो देता है वो, तो उसपे जान की क्यों।
गैर हो या अपना, मूक हो या बोलने वाला, दर्द तो होता है यारो को एक जैसी भेट चढ़ाये।
क्रुर कर्मों की सजा देती है नियति, तो इंसान को किसने हक दे डाला।
एक जान किसी को दे न सके तो जान लेने का हक हमको किसने दे डाला।
जारी है ऐसे न जाने कितनी क्रुर प्रथा, एक के बाद दूजी सदियों से चलती जाये।
किसी की जान लेने से मिले न किसी की आत्मा को शांति, ये तो प्यास बढ़ाये घृणा की।
फरियाद करता है एक दीवाना जमाने से, पापों की सजा होती है सच्चे प्रायश्चित मैं।
बंट गये हम जाति ओर देश की दिवारों मैं, है न जरूरत हमको किसीके इशारे की।
प्यार के बंदे थे प्यार के देश से, प्यार को बांटने के सिवाय न है कोई कर्म हमारा।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
मत पूछो, मत पूछो, क्या क्या होता है, यार से बिछुड़ने के बाद।
Next
मैं तेरा, मैं तेरा, तेरे सिवाय मैं न किसीका।
*
*