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Hymn No. 2822 | Date: 05-Aug-2004
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प्यार, तुझे कितना करुँ, प्यार ये तू बता दे।
प्यार, तुझे कितना करुँ, प्यार ये तू बता दे।
प्यार, अपने प्यार को कैसे करुँ तुझपे इजहार ये तू बता दे।
प्यार, कैसे होता है किसीको किसीसे, ये प्यार तू सिखा दे।
प्यार, मैं कैसे कोई भूल जाये सब कुछ, जो जीना होता है मुहाल।
प्यार, कैसे डुबो देता है दिल को दर्द में, तो भी चैन क्यों पाये इसी में।
प्यार, के वश में क्यों होती है दुनिया, ये राज तू समझा दे।
प्यार, का क्यों मारा है परवर दिगार, समझ न आये क्यों मुझे।
प्यार, मैं क्यों होती है ताकत इतनी, जो खींच लाये किसी को।
प्यार, से किमती होता नहीं कुछ, फिर क्यों न समझ पाये इसे मन।
प्यार, के मामले में हूँ क्यों इतना कंगाल, भर दे झोली तू प्यार से।


- डॉ.संतोष सिंह