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Hymn No. 279 | Date: 14-Aug-1998
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दोष ना देखना कभी दूसरों में, अपनी कमियों का ध्यान रखना सदा;
दोष ना देखना कभी दूसरों में, अपनी कमियों का ध्यान रखना सदा;
पल – पल उसे याद कर – करके, पश्चाताप के आँसू बहाना ।
फरियाद तू इक् बार करना, विश्वास उसपे सदा रखना;
अपने जिंदगी को जीते हुये, शरण में तू उसके रहना ।
ज्ञान तूझे जहाँ ये मिलें नम्र होके ले लेना, छोटा – बडा का ख्याल ना करना,
नम्र तू सदा रहना सबके सामनें, ज्ञान की ना उम्र होती, ज्ञानी तो सबसे बडा।
प्रेमियों के प्रेम को देखके तुझे बहुत कुछ है सीखना;
पत्थर से प्रगट करते है परम् परमात्मा को, भावों में बहते है सदा।
तू छोटा बन, कीसी न कीसी कारण से तू सबसे छोटा बनना;
छोटे – बड़े के भेद से दूर रहना, अपने आपको सदा छोटा समझना ।
वैसे भी हमारी हस्ती क्या है, कृपा हुयी उसकी तो जनमें हम;
इस खाक की खाक में मिट जान है; कहाँ थे हम, कहाँ रहना ।
- डॉ.संतोष सिंह
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