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Hymn No. 280 | Date: 15-Aug-1998
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दिल मेरा पुकारे तोहे बार – बार, देर हो जाये तेरे दर पे आनें को ।
दिल मेरा पुकारे तोहे बार – बार, देर हो जाये तेरे दर पे आनें को ।
मन में अपने प्रति रंज हो जाये, मन में गुनगुनाना अच्छा लगे तेरा नाम ।
युँ ही कुछ कुछ ऐसा करने को दिल करता है जुड़े रहे तुझसे हर पल ।
तुझसे हटके महफूज हो जाता हूँ अपने आप में, मैं सुहाता नहीं मन को ।
भेद मिटा के तन – मन का, लीन रहना चाहूँ तुझमें हर पल ।
गीत गाना है हर पल यूँ ही गुनगुनाते हुये तुझको सुनाना है ।
खो जाना है तेरे ख्यालों में, रहे ना मन में कोई भी विशाद ।
फसाद ना नया खड़ा करना है कीसीके साथ, जो जैसा है वैसा ही अपनाना है ।
हम तेरे साथ जुड - जुडके उदार बने है, वे भी तेरे पास आके बन जायेगे मन माफिक तेरे ।
दोष ना है ढूँढ़ना कीसी में, तेरा नाम लेते हुये उसके अच्छे गुणों की चर्चा है करना ।
बिन कीसी आस के मन को हर बात पे दिलासा दिलाते हुये नाम है लेना तेरा,
पाने की इच्छा ना करना, ना ही गुम होना निरर्थक चर्चाओं में बस तेरा नाम है लेना ।


- डॉ.संतोष सिंह