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Hymn No. 2838 | Date: 11-Sep-2004
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सम्भाल ले, सम्भाल ले, ओ मैया, आज तू मुझे सम्भाल ले।
सम्भाल ले, सम्भाल ले, ओ मैया, आज तू मुझे सम्भाल ले।
जीवन में कई मौके गंवाये ओ मैया, अब न गवाना चाहूं एक भी।
होश उड़ गये है जीवन के इस मुकाम पे, तू छोड़े तो कोई न संवार पाये।
तेरे सिवाय न था कोई अपना, चाहे हो कोई कितना लगा सगा वाला।
सच्चे दोस्तों ने भी साथ छोड़ा, जो आलस मैं हमको डूबते हुये देखा।
निपट अकेला हूँ, कोई, न दिशा निर्देश, कभी मिले तो वहम में पड़ जाऊँ।
ये तेरा चाहा हुआ है या मेरे मन का खेल तोड़े तोड़ न पाऊँ कर्मों की जेल।
करने की बहुत चाहत है माँ, तू स्पष्ट आके दे निर्देश जो खत्म कर दे मन का मैल।
अकेलापन खले पल पल, तेरे रहते लगे अजब सा हमेशा के लिये तू दूर कर दे।
अकूत सामर्थ्य से भर दे तू मुझे, करवा ले जो चाहा हुआँ है तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह