VIEW HYMN

Hymn No. 2839 | Date: 07-Oct-2004
Text Size
कभी कभी तो ऐसा हो, तू दूर रहते पास आ जा।
कभी कभी तो ऐसा हो, तू दूर रहते पास आ जा।
दिल में जलती प्यार की आग को तू भड़का जा।
रोशन है हम तुझसे, तेरी चाहतों पे टिका है अस्तित्व हमारा।
न जाने किस पल फनाह हो जाये गफलत मैं पड़के।
लडूँगा आखरी दम तक, तेरा हमदम बन जाने के लिए।
तेरी कृपा के चलते महका जाऊंगा तेरे आंगन को।
टीस उभरे इतनी जोर की, आह भरता हूँ तेरी यादों में।
गम का पूतला नहीं, रम जाना चवाहता हूँ तुझमें।
बातों के सैलाब से निकलके, कुछ कर जाना चाहता हूँ।
तुझमें सिमटके गुजर जाना चाहता हूँ जिंदगी के दौर से।


- डॉ.संतोष सिंह