VIEW HYMN

Hymn No. 2840 | Date: 08-Oct-2004
Text Size
कहने को तो बहुत कुछ कहता हूँ तुझसे,
कहने को तो बहुत कुछ कहता हूँ तुझसे,
प्यार के नाम पे न जाने कितनी बार ढूँढता हूँ तुझको।
चाल चले किस्मत मेरी, नींद हराम करुँ करनी से।
लाख सँवरना चाहा, पर हालात के आगे टिक न पाया।
रोना रोता नहीं हूँ कमियों का, पर उबरना चाहता हूँ।
तेरे शब्दों को प्राणों की कीमत पर कर गुजरना चाहता हूँ।
ध्यान न दिया वख्त रहते तेरी ताकीदों पे,
जब आया लपेटे मैं दुनिया के, तो बहुत गुहार लगायी तुझसे।
अब तो सुरों को साध दे, शब्दों को गीतों मैं ढाल दे।
पटरी से उतरी इस गाड़ी को मजिल की ओर पहुँचा ले चल।


- डॉ.संतोष सिंह