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Hymn No. 282 | Date: 15-Aug-1998
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तेरी इस भोली – भाली मुस्कान में छुपा है सारे ब्रह्माण्ड का रहस्य ;
तेरी इस भोली – भाली मुस्कान में छुपा है सारे ब्रह्माण्ड का रहस्य ;
तेरे नजरों में करूणा है हम सभी प्राणियों को तारने के लिये ।
प्यारी है तेरी बातें, दुःखों को धुआँ बनाकें उड़ा देती है, रोते को हँसाये ।
जग के हर नियम – कायदे से तू ऊपर है, बने भी है तो तूझे अपनाने के लिये ।
तेरी चाल में है मस्ती, हर कदम पे तेरे, ठुमकने लगता है दिल हमारा;
तू है इतना कृशकाम क्यों देता है, सारे जग को सहारा, हमारें कर्मों का भार उठाता है तू
तेरी हर अदा बेबस, कर जाती है हमें कमजोरियों का त्याग करना सीखाती है तुझे अपनाने के लिये
तेरे हर गाने से नई चेतना मिलती है हमें, झुमाँ देता है भूल जाते है हम सब कुछ
भेद ना रखे तू कीसी से सबको प्यार बाँटे तू बनके उसका अपना ।
तू सीधा सरल सा हर गुढ बातों का जवाब देता है बिना कोई लाग लपेट कें ।


- डॉ.संतोष सिंह