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Hymn No. 284 | Date: 16-Aug-1998
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ये मेरे प्रिय पिता तू क्यों दूर रहता है मूझसे,
ये मेरे प्रिय पिता तू क्यों दूर रहता है मूझसे,
अच्छी तरह जानता हूँ मैं, तू गिना सकता है अनेक कारण ।
ज्ञानियों का ज्ञानी, ज्ञान का तू है जन्मदाता,
मैं मुर्ख बडबोला नहीं लायक तेरे दर्शन के ।
ऐ मेरे अन्नदाता, सर्वदाता, क्या ये सच नहीं, तेरा सिवाय कौन है मेरा।
दूर – दूर तू कीतना भी रहे मुझसे, मैं तेरे दर पे हर बार आऊँगा ।
मैं ये भी ना कहता हूँ, दूर – दूरानें के लायक में नहीं;
मैं तो होता हूँ खूश, कम से कम इस लायक तू है समझता।
नासमझ ही नहीं, अवगुणें का हूँ खान में;
पर तेरी कृपा से परमपिता पल दो पल के लिये तूझे याद कर लेता हूँ।
तुझसा दयालू ना देखां मैंने, बार – बार गिरतें है कर्मो के खाई।
सब भूलाकें देता है तू सहारा, अपनातों प्यार लुटाता है ।


- डॉ.संतोष सिंह