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Hymn No. 2881 | Date: 04-Nov-2004
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तुम गाने को कहते हो तो बताओ कैसे गायेगा दिल जो भेद मन में हो।
तुम गाने को कहते हो तो बताओ कैसे गायेगा दिल जो भेद मन में हो।
दिल से दिल जो जुड़ा रहे तो गायेगा दिल भुलाके सब कुछ डूबा तुझमें।
यादों में खोते शुरूआत होती है दिलकी बातों की, जो बन जाये गीत।
दिल की धड़कन देते हैं संगीत, मन के तारों को छेड़े कोई अनजाना मीत।
वकत है प्रेम की सबसे अलग थलक, पहचान बताये नजर जो डूबीं हो मस्ती में।
सुरूर जो एक बार चढ़े उतारे न उतरे, यहाँ तो हारके भी होती है जीत।
दीवानगी का असर दिखता है चाल में, जो मचले पी पीके मस्ती का जाम।
फिदा होता है परवाना देख देखके, शमा जो रौशन करती जाये सबको बिन बात को।
उफ निकल जाती है शमा को जो दर्द में मुस्कुराके अपने पास बुलाते देखा।
खेल है न जाने कैंसा माया का, प्रेम ओर ज्ञान का दस्तूर दिल को नहीं जमता।


- डॉ.संतोष सिंह