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Hymn No. 2882 | Date: 05-Nov-2004
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यादों में खो जाता हूँ, गुजरते ही तेरी गलियों मैं।
यादों में खो जाता हूँ, गुजरते ही तेरी गलियों मैं।
बेंमानी लगने लगता है जीवन, जो ध्यान में आ जाता है तू।
मानो सारे ख्वाब साकार हो गये, जो तुझमें एकाकार हो गया।
सोचने समझने पे विराम लग जाता है, जो पास तेरे पहुँच जाऊँ।
बिन् मौसम के बयार बहे, मस्ती में झूम बिना वजह के।
हालात तो वैसे के वैसे रहते है, फिर भी बदला बदला सब कुछ लगे।
सब कुछ दरकिनार करके, तेरा हो जाने का मन करता है।
तेरे मेरे बीच के सारे फासलों को खत्म करके एक हो जाने का दिल करता है।
कानों कान जो हो न खबर किसीको, उस दिल की बात को तू समझता है।
दुनिया खड़ी रहती है एक राय पे, सब धारणाओं को तोड़के तू समां लेता है।


- डॉ.संतोष सिंह