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Hymn No. 2883 | Date: 05-Nov-2004
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प्यार ही ऐसा है जिसका दीवाना होता है दिल, क्यों किसी से होता है कोई जाने न।
प्यार ही ऐसा है जिसका दीवाना होता है दिल, क्यों किसी से होता है कोई जाने न।
कभी प्यार में वो रोता है हंसता है, पर दीवानगी की हद तक दिल उसे चाहता है।
प्यार कभी एकतरफा हो या दोतरफा, अगर प्यार सच्चा है तो हारके भी जीतता है।
प्यार एक खुशनुमा अंदाज है, जो दिल से निकलके दिल को ही चूर करता है।
प्यार का कोई नाम नहीं है, ये तो आत्मा का आत्मा से प्यार भरा रिश्ता है।
प्यार में चिरआनंद है, जो एक बार को इसमें खोया लुट लुटाके भी प्यार को पाता है।
प्यार से पार न पाया कोई, प्यार मैं जो संमायी है सारी दुनिया की ताकत।
प्यार एक अंदाज है, जो अंतर में उमड़े भावो से बरसे ओर दिल को चुराये
प्यार में जो बात है, सच पूछो वो तो अनगिनत आत्माओं का संवाद है।
प्यार एक अनोखा बंधन है जो मजबूर कर जगत नियंता को जन्म लेने के वास्तें।
प्यार वो फरमान है जो दिल से लिखा जाये ओर दिल से ही पढ़ा जाये।
प्यार वो यादगार है जो जन्मों जन्म बीते जाने पे भी दी जाती है मिसाल।
प्यार वो चरम अवस्था है, जहाँ प्यार को बस प्यार की ही सुध बुध रहती है।
प्यार से प्यारा कोई न होता है, नजरों से परे जो वो दिल को देखता है।


- डॉ.संतोष सिंह