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Hymn No. 2885 | Date: 10-Nov-2004
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तुम चाहो तो खत्म कर दो क्षण भर मैं जिंदगी की तस्वीर।
तुम चाहो तो खत्म कर दो क्षण भर मैं जिंदगी की तस्वीर।
जिंदा हूँ तो मात्र तेरी कृपा से, तुझसे अलग मैं था न कभी।
छोटी सी भुल हो या बड़ी उससे ज्यादा मैं हूँ तेरी कृपा की बूंद।
कुछ ऐसा न है जो कह सकूं कि मैं हूँ कुछ तेरे संसार में।
नाता है तेरा मेरा मां बेटे का, क्यों हंसाके रुलाये तू बार बार।
कर्मो के कारण से तो पीछे हूँ, उसपे भी जो तू दूर कर दे अपने आपसे।
कहाँ जाऊँ मैं किसको बताऊँ, तू भी तो सब जानके अन्जान है।
मय्यसर होते होते चूक जाता हूँ, न जाने किस वजह से तू रूठ जाता है।
मौका देती है तू लाखों लाख, पर सजा के पलों को खींच लाता हूँ।
कृपा कर ओ माँ कृपा कर, माँ बेटे पे सतत तेरी कृपा कर, जो दूर करे सारी कमियों को।


- डॉ.संतोष सिंह