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Hymn No. 2886 | Date: 10-Nov-2004
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घबरा जाता है दिल, जब जब आलस मैं डूबता हूँ।
घबरा जाता है दिल, जब जब आलस मैं डूबता हूँ।
पास होते हुये तू दूर नजर आये न जाने क्यों गुम हो जाये।
बातें बनाता हूँ अपनी नाकामियों को तुझसे छिपाता हूँ।
कर जाना चाहता हूँ, न जाने क्यों प्रभु करते करते चूक जाता हूँ।
मैं ना ना कहता हूँ, फिर भी अपनी कमियों से दिन रात बढ़ता हूँ।
इंसान हूँ इसलिये बहक जाता हूँ, तेरी ओर आशा से देखता हूँ।
मार देना या तार देना सब कुछ है हाथों में तेरे तो क्यों परेशान होता हूँ।
मेरी हालत कैसी है मत पूछो, दिन रात अपने किये की आग मैं जलता हूँ।
तड़पता हूँ सोच सोचके ऐसा क्या कर दूं कि हो जाये तू खुश।
बनती बिगड़ती बातों को सफल करते हो जाये तू हरपल के वास्ते मेरा।


- डॉ.संतोष सिंह