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Hymn No. 2891 | Date: 16-Nov-2004
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आ जाओ किसी रूप में तुम आ जाओ, आके दिल की प्यास बुझा जाओ।
आ जाओ किसी रूप में तुम आ जाओ, आके दिल की प्यास बुझा जाओ।
माना तड़पता हुँगा कम तुम्हारे प्यार के पैमाने मैं, आके दिल की प्यास तो बुझा जाये।
गुजरने को गुजर जाऊंगा, पर यार तेरे बिना तीनों लोक मैं कैसे रह पाऊंगा।
चाहिये ना हमको किसीका हक, पर तेरा हक रहे मुझपे सदा के वास्ते।
सिसकता हूँ भीड़ में हो अकेला, शोर के बीच भी है खामोशी तेरे वास्ते।
बहुत कुछ दिया है बारबार दिया, पर तेरे प्यार का हमको हकदार तो बनाओ।
बेमिसाल तू है सदा से, हमको कायम करने दे तेरे प्यार की मिसाल एक दफा तो।
जिंदगी कि कीमत न की हमने कभी, पर तेरे वास्ते तड़पता रहा हूँ सदा से।
माना तेरे पग की धूल नहीं मैं, पर तेरे चरण कमलो का हकदार तू बना दे।
तेरी कृपा से एक ख्वाब को देखा था, जागने पे तेरी सूरत को दिल में पाया।
तब से अब तक अनायास ही गाता हूँ, आओं.. आओ किसी भी रूप मैं आओ आके दिल की प्यास बुझा जाओ।


- डॉ.संतोष सिंह