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Hymn No. 2893 | Date: 16-Nov-2004
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मुझे मालूम नहीं, मालूम नहीं, क्या मांग रहा हूँ मैं तुझसे,
मुझे मालूम नहीं, मालूम नहीं, क्या मांग रहा हूँ मैं तुझसे,
पर जो भी हो तुमसे दिल की बात कह रहा हूँ।
मुझे मालूम नहीं, मालूम नहीं, क्या हाल होगा मेरा,
पर जो भी हो जो तू चाहेगा वही हाल होगा मेरा।
मुझे मालूम नहीं, मालूम नहीं, ये सब क्यों कह रहा हूँ तुझसे,
पर जो हो बिन कहें मैं रह नहीं सकता तुझसे।
मुझे मालूम नहीं, मालूम नहीं, तुझसे क्या है मेरा रिश्ता,
पर जो भी हो मेरा तुझसे गुमनाम है रिश्ता।
मुझे, मालूम नहीं, मालूम नहीं कब होगा हमदम तू मेरा,
पर जो हो तू सदा से साथ साथ है मेरे।
मुझे मालूम नहीं, मालूम नहीं तुझसे क्या हूँ मैं चाहता,
पर जो भी हो तेरे बिन पल भी रह पाता नहीं हूँ।


- डॉ.संतोष सिंह