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Hymn No. 2895 | Date: 20-Nov-2004
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मत जाओ छोड़के तुम हमको आज, करता हूँ खुद के वास्ते तुझको याद।
मत जाओ छोड़के तुम हमको आज, करता हूँ खुद के वास्ते तुझको याद।
स्वार्थों में डूबां हूँ उपर से नीचे तक, ना ही ऐसा करम जो रोक लूं तेरे कदम।
हर पल दुखाया तेरे दिल को, पल पल चुभाया तेरे तन मन को पीड़ा से।
हंस हंसके तू सहता रहा, सामना होने पे मुस्कुराके तू सब कुछ देता रहा।
कभी तुने ना चाहा कुछ हमसे, जीवन जीने की सीख तो मिश्री की चाशनी में लपेटके।
क्या जाने हमने क्या किया, पर तूने रास्ते के पत्थर को दे दिया सलतनत अपनी।
जीता था लोगों की ठोकरे खा खाके, सभी ने गले से लगाया तेरा प्यार पाते।
संवार दिया तूने एक गुमनाम को, हमेशा के वास्ते अपना नाम दे देके।
कभी समझा नहीं तेरी प्यार भरी बातों को, अब पुकारता हूँ दिल से तुझे।
भुवन रह कृपा करके तू हर पीड़ा से, न सता इतना अपने आपको हमारे वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह