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Hymn No. 286 | Date: 17-Aug-1998
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सजूँगा मैं बस तेरे लिये, रंग के रंग में तेरे,
सजूँगा मैं बस तेरे लिये, रंग के रंग में तेरे,
हर श्वास पे तुझे मैं याद करता रहूँगा ।
नित्य नये – नये वेष धरूँगा, रिझाने के लिये तुझको;
सुध – बुध खो दूँगा अपना बनाने के लिये तुझको।
सबकी जिल्लतें सहूँगा पर तुझसे मिन्नत हर वक्त करूँगा;
करूँगा धरूँगा सारा काम पर नाम तेरा लेता रहूँगा ।
तेरी छवि देखूँगा सबमें, करूँगा, मैं झुक – झुक प्रणाम;
खोया रहूँगा तुझमें मैं खुद को मिटाने के लिये ।
सताऊँगा मैं इस तन को, तेरे पास जाने के लिये;
होगा ना कोई खबर, बेखबर रहूँगा मैं तुझमें।
त्याग दूँगा सब कुछ, जो डाले बाधा तेरे मेरे बीच,
कोई ना सपना देखूँगा, हर सपनें में तुझको देखूँगा।
कंपकंपाते हाथों से तेरे गीत लिखता रहूँगा;
दम खोने तक दम भरता रहूँगा तेरे नाम का।
पीना पड़ा जहर तो पीऊँगा तेरे नाम लेके,
मरूँगा मैं तेरे दर पे, ध्यान रहेगा मुझे तेरा ।
हर बंधन को तोड़ दूँगा, तुझको अपनाने के लिये,
हर इक बंधन में जकड लूँगा खुदको तुझको पाने के लिये।


- डॉ.संतोष सिंह