VIEW HYMN

Hymn No. 287 | Date: 17-Aug-1998
Text Size
गम ना है मुझे कीसी बात का, गम है तो बस इस बात का,
गम ना है मुझे कीसी बात का, गम है तो बस इस बात का,
अपना के भी अपना बना ना सका, जुड के भी ना जुड़ पाया तुझसे ।
मलाल नहीं है कीसी से, पर खुद सवाल मैं बार – बार हूँ करता;
जब तू मुझे इतना पसंद है, तो मैं क्यों अपने नापसंदियों के संग हूँ दिन गुजारता ।
तेरे साथ रहके भी क्यों दूर हो जाता हूँ तुझसे, कब तक चलता रहेगा ये सब;
तेरा साथ छूटते ही याद रहते हुये भी तू, क्यों जाता हूँ भूल मैं तुझे ।
सुना है कि तू जगाता है सोये हुये को, मुझे ना है पता ये की मैं सोया हूं की जागा;
मैं किसी से नहीं भागना चाहता, मैं तो बस तेरे पास चाहता हूँ रहना ।
तेरी मर्जी के मुताबिक में ढल नहीं पाया, तो मिट जाने में कोई ग़म नहीं;
सब कुछ बदलता है फिर मुझको तू क्यों नहीं है बदलता ।


- डॉ.संतोष सिंह