VIEW HYMN

Hymn No. 288 | Date: 18-Aug-1998
Text Size
रहते हो तूम हमारे भीतर, फिर भी भेंट ना हो पाती,
रहते हो तूम हमारे भीतर, फिर भी भेंट ना हो पाती,
दिल ही दिल में गूँजे तेरी आवाज, फिर भी बात ना हो पाती ।
तडपता है मेरा मन एक बार को तेरा साथ पाने के लिये,
फिर भी तेरा साथ ना मिल पाता, मन मसोस के हूँ रह जाता ।
खता मेरी अनेक है, साथ अधूरा, अभी तो चला हूँ तेरी ओर,
पहुँचने के लिये जल्दी सताने लगी, भला सा कुछ ना है लगता ।
तुझसे मिलके बिछुडने का ना है दिल करता, किसी न किसी बहाने,
तेरे पास रूक जाने का है मन करता, तेरी मर्जी मानके चले जाते ।
यह सोचके अगली मुलाकात में ना बिछुडेंगे हम तुझसे,
तेरे पास आके तेरे होके रह जायेगे, तेरा दर होगा अंतिम पड़ाव हमारा ।


- डॉ.संतोष सिंह