My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 289 | Date: 18-Aug-1998
Text Size
प्रियतम मेरे, झूठी ना रहती है मेरी कोई बात,
प्रियतम मेरे, झूठी ना रहती है मेरी कोई बात,
मेरा मन ही दगा दे जाता है मुझे हर बार,
हर बार कोई ना कोई कारण गिना जाता है वो ।
मैं कुछ ना सुनना चाहूँ उसकी; फिर भी अपनी बातों में
फँसा जाता है मुझे ।
शिकायतों का ढेर रखकें, अपनी विवशता है बतलाता;
अपने आपको अनेक बंधनों में जकड़ा दिखलाता ।
कसमें खाता, ना होगी अगली बार कोई और खता;
बस इक् बार तू मुझे छोड दें।
मैं बहुत बार समझा चुका उसे, कई - कई सजा दे चुका;
ना बदला वो; अपने संग मुझे भी घसीटा ।
हमने भी सौप लिया, रख लेगे सीने पे पत्थर अब;
छोड देंगे हमहीं उसका संग ।
तू है हमको बहुत भाता, हमको तेरे आगे कुछ नहीं सुहाता
जो कुछ भी घट जाये, मेरा कुछ नहीं जाता ।
तेरे पास आने के लिये हर कीमत चुकाने को हूँ तैयार मैं,
कोई ना है, मुझे बहाना बनाना ।
मुझे तो बस है तेरे चरणों मे आना, चाहे जैसे भी
तेरे दास बनके है दिन गुजारना।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
रहते हो तूम हमारे भीतर, फिर भी भेंट ना हो पाती,
Next
इक् बार नहीं कई बार भटकेंगे राह, छोटी-बड़ी चूक करेंगे हजार ।
*
*