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Hymn No. 2903 | Date: 09-Dec-2004
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एक बार जो पीना सीख जाओगे, प्रभु नाम रस।
एक बार जो पीना सीख जाओगे, प्रभु नाम रस।
तो सतत् बसा लोगे अपने अंतर मैं पूर्ण परमात्मा को।
हो जाये कुछ भी जिंदगी में, कुछ न बिगड़ेगा तुम्हारा।
तुम गाओगे प्रेम गीत उमंगो से भरे थिरकते हुये।
पल पल होगा नया, यों ही आयेगा आनंद तुम्हारी जिंदगी मैं।
कोई छीनना चाहे तो न छीन सकेगा, तुम्हारे साथ आनंद मैं जी लेगा।
दास्ताँ प्यार की अनोखी कहोगे, जिसे सारा संसार मगन होके सुनेगा।
फिर भी मतलब न होगा तुमको किसी से, तुम यों ही गाते रहोगे।
तुम्हारी ये अदा चुरा ले जायेगी दिलों को, पराये भी होंगे अपने।
मिट जायेगी सारी दूरियाँ, जो जात पात से परे होगा इंसान।


- डॉ.संतोष सिंह