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My Divine Blessing
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Hymn No. 2904 | Date: 09-Dec-2004
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तुम कहते हो तो मान भी लूंगा, जो मैं अपने आपको जानता नहीं।
तुम कहते हो तो मान भी लूंगा, जो मैं अपने आपको जानता नहीं।
प्यार से अनजान था, प्यार की बूंदो से जो सींचा तूने मेरे दिल को।
जीता था बस मैं अपने आप के लिये, नाता था जो सारी दुनिया से।
कहा करने मैं कितना अंतर था, फिर भी बुलाया तूने जो पास अपने।
सांप की केंचुल को उखाड़ फेंका, समरसता से भरे जीवन के दौर को।
जो सोचा न था कर सकता था हूँ मैं इसे, आज तैयार हूँ तेरा चाहा हूआ।
कंहा से क्या होता रहा, तूने सम्भाल रखा फूल के मांनिद मुझको।
तूफां का दौर आया जीवन में न जाने कितनी बार, तूने न जाने दिया दूर अपने से।
लाखों लाख सर चढ़ा दूंगा चरणों मैं तेरे तो भी पा नहीं सकता पल भर को साथ तेरा।
तेरी कृपा पे कायम है दम मेरा सदा से, जब तक तू चाहे तक हूँ साथ तेरे।
- डॉ.संतोष सिंह
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