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Hymn No. 2905 | Date: 10-Dec-2004
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तेरी प्रेम अगन मे जलता हूँ दिन रात, यादों के सहारे सकून पाता हूँ।
तेरी प्रेम अगन मे जलता हूँ दिन रात, यादों के सहारे सकून पाता हूँ।
नित्य नये नये ख्वाबों को देखता हूँ, आज नही तो कल जो होंगे साकार।
कर्मों की बेड़ियाँ रोके कदम, फिर भी निकला हूँ तेरा साथ पाके मजिल की ओर।
कोई नहीं अपना इस संसार में, मानो या न मानो तुझसे ही जो हैं सारे रिश्ते नाते।
चीर के देखोंगे तो मिलेगी तस्वीर तेरी, जो हो नहीं सकता अब मैं किसी ओर का।
शिद्दत से किया हूँ इंतजार तू ही बता तेरे बिना चैन कैसे दिल को आयेगा।
में जानता नहीं चाहता हूँ, न जानना चाहूँ, पर ये सच है तेरे बिना मैं नहीं, मैं नही।
मक्कारियत भरी होगी लाखों, पर मेरे प्यार का हर हिस्सा सच्चा है तेरे वास्ते।
किसी को कोई दोष न देता हूँ, ये अंजाम मेरी किस्मत का जिसे बदल सकता है तू।
कहने ओर करने से परे जीना चाहता हूँ श्वासों मैं तुझे, सदा के वास्ते बसाके।


- डॉ.संतोष सिंह