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Hymn No. 2906 | Date: 11-Dec-2004
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धीरे धीरे रमता जाये दिल, रमने की जगह जो एक तू है।
धीरे धीरे रमता जाये दिल, रमने की जगह जो एक तू है।
यहाँ वहाँ कही भी धरा पे जाऊँ, हर पल बस मैं तुझे पाऊं।
आँखे बंद हो या खुले, जब भी अहसास हो तू ही तो साथ रहता है।
एक पल बीते या न जाने कितने पल, सकून मन को तो तुझमें आये।
लूटने को तो लूट रही हैं श्वासें, पर तेरे बिन घड़ी भर जी न पाऊँ।
अपने हो या पराये सब एक से लगते है, जो दिल पे तेरा आलम होवे।
कहे चाहे कोई भी कुछ, होता है मुश्किल अब जीना तेरे बिना।
हो जीवन का कोई भी पल, किसी न किसी रूप में तेरी याद आये।
दिन हो या रात बेचैन मन किसी न किसी बहाने खिंचा चला जाये तेरी ओर।
बीतने को तो बीत जायेगी जिंदगी जो तू मिला तो बीतके भी चैन न पाउँगा।
- डॉ.संतोष सिंह
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तेरी प्रेम अगन मे जलता हूँ दिन रात, यादों के सहारे सकून पाता हूँ।
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नहीं नहीं अब ओर सहा नहीं जाता, तेरे रहते अब ओर रहा नहीं जाता।
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