VIEW HYMN

Hymn No. 2916 | Date: 11-Jan-2005
Text Size
जब दिल बार बार ढूंढे तुझे, तब भी क्यों तू न दूर दूर तक नजर आये।
जब दिल बार बार ढूंढे तुझे, तब भी क्यों तू न दूर दूर तक नजर आये।
चाहा हो जाना हमेशा के वास्ते तेरा, चाहते हुये भी हो न पाया तेरा।
ऐसी कैसी है कर्मों की जंजीर, जो जितना तोड़नी चाहूँ उतनी जकड़ती जाये।
ये कैसी किस्मत की लकीर है, जो आड़s आये बदलने मैं तकदीर मेरी।
मर रहा हूँ जीते जी हर पल मैं, पल भर को न होने दूंगा तस्वीर तेरी।
ख्वाबों को साकार करना न आया, तेरे ख्यालो में जीता जाऊँगा जिंदगी को।
प्रभु मैं मेरे वास्ते न हुआ तेरा, पर तेरे वास्ते हो जाऊंगा मैं तेरा।
शुक्रिया शुक्रिया हर उन पल का जो गुजारा साथ तेरे, शुक्रिया शुक्रिया जो याद आये तेरी।
मलाल है तो बस अपने आप से, क्यों का क्यों मैं क्यों सिमट गयी जिंदगी।
तेरे पास पहुँचके क्यों न हो सका हमेशा के वास्ते मैं तेरा।


- डॉ.संतोष सिंह