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Hymn No. 2931 | Date: 19-Feb-2005
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चला आया तेरे दर से, लगता नहीं दिल अब कहीं।
चला आया तेरे दर से, लगता नहीं दिल अब कहीं।
चाहता हूँ पहुँच जाऊँ पास तेरे, पहुँच पाऊँ नही क्यों मैं।
गाहे बगाहे सताये यादे तेरी, मसरूफ मैं बार बार तू याद आये।
मन मसोस के रह जाता हूँ, जब चाहके चाहत से खुदको दूर पाऊ।
ऐसी क्या खता हुयी थी, जो होना पड़ा मजबूर तुझको देने सजा।
प्यार भरा अंदाज था तेरा, विरह के आग में जो दिन रात जलता हूँ।
खोज खबर हर पल तुझे है, फिर भी पास क्यों न तू आये मेरे।
मंजिल के पास जाना किसे है, मजिल जो हो साथ मेरे।
फिर भी मोहताज करे दीवाने को, पल भर के झलक के वास्ते।
रहनुमाँ होगा तू सबका, पर दिलरुबा है तू मेरा पल पलके वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह