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Hymn No. 2932 | Date: 22-Feb-2005
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तुम छोड़ दोगे तो कौन अपनायेगा, तुझसे दूर जाके हम कहाँ जायेंगे।
तुम छोड़ दोगे तो कौन अपनायेगा, तुझसे दूर जाके हम कहाँ जायेंगे।
तेरे सहारे आये थे, तुझसे दूर होके हम कहीं के न हो पायेंगे।
इच्छाओं के हैं गुलाम, फिर भी तो कहलाते है जग में बंदे तेरे।
एक बार कर दे तू बेड़ा पार, बट्टा न लगने दूंगा नाम को तेरे।
जो कमियाँ है आज मुझमें, होगी न कल को प्रभु तेरी कृपा से।
ये सच है मेरे भाग्य में न है कुछ मेरा, जो भी है दिया हूआ है तेरा।
प्रियतम् मेरी आस को न तोड़ तू, तेरे सहारे लेता हूँ जो श्वास।
इच्छाओं की दासता की कहानी है पुरानी, मुझे तो बनना है तेरा।
पास में कुछ नहीं तो क्या, पर रोना न रोना है जिंदगी का।
मैं आया हूँ तेरी कृपा से, ओर मुझे बनना है तेरा सिर्फ तेरा इस जन्म में।


- डॉ.संतोष सिंह