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Hymn No. 2934 | Date: 23-Feb-2005
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हम भी कम नही, हम भी कम नही, देने को उठे हुये हाथों को रोकने में हम भी कम नही।
हम भी कम नही, हम भी कम नही, देने को उठे हुये हाथों को रोकने में हम भी कम नही।
जब जब वख्त आया, देर न किया देने मैं, तूने रोका तुझे पलक झपकते हमने।
खोया हमने न जाने कितना कुछ कर्मों के चलते, फिर भी साथ न छोड़ा तूने।
मसरूफ रहते थे अपने मैं तेरे पास रहके, देना न चाहा तूने क्या या मैने लेना न सीखा।
पग पग पे हाथ पकड़के चलना सिखाया, हमारे वास्ते तू अपनों से भी टकराया।
सोये को उठा सकता है कोई, पर जागे हुये को कोई उढ़ाये तो कैसे।
बातों ही बातों में समय को बिसराया, अब जब होश मैं आया तो तुझे पास पाया।
आज जब जो तू देने को तुला है, झोली फैलाये हम हर ओर से खड़े है पर गिराना तू तो झोली में गिरना।
चाहें कुछ हो जाये पर इस बार तुझसे है पाना, तेरे दिये हुये को सहेज के ले जाना।
किसी कारण से तू न दूर होने देना, इस खाली झोली अपने से भरपूर भर देना।


- डॉ.संतोष सिंह